दुलदुला वन क्षेत्र में शिकार के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर तार बिछाने का आरोप, पांच संदिग्धों की तलाश जारी

जशपुर। जिले के दुलदुला वन परिक्षेत्र में करंट प्रवाहित तार की चपेट में आने से एक नर हाथी की मौत हो गई। वन विभाग की जांच में सामने आया कि जंगल और खेत की सीमा पर वन्यजीवों के शिकार के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा बिजली का तार बिछाया गया था। मामले में वन विभाग ने 18 घंटे के भीतर छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि पांच अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
नोनपानी जंगल में मिला हाथी का शव
24 सितंबर की सुबह ढोढ़ीआरा गांव के नोनपानी जंगल में नर हाथी का शव मिला था। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की।
वन अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जंगली सूअर या अन्य वन्यजीवों के शिकार के लिए करंट वाला तार बिछाया गया था। इसी तार की चपेट में हाथी के आने की बात सामने आई है।
तीन मकानों की तलाशी, शिकार सामग्री बरामद
जांच के दौरान संदिग्धों से पूछताछ के बाद ढोढ़ीआरा गांव के तीन मकानों की तलाशी ली गई। वन विभाग के अनुसार यहां से करंट प्रवाहित करने में इस्तेमाल तार और शिकार से संबंधित सामग्री बरामद हुई।
एक मकान से मोर के पंख और फंदा भी जब्त किया गया। वहीं सलिंदर और रूपेश की निशानदेही पर जंगल में नाले के पास छिपाकर रखा गया बिजली का तार बरामद किया गया।
वन विभाग ने बरामद सामग्री को जब्त कर घटनास्थल और जब्ती प्रक्रिया की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी कराई।
6 आरोपित गिरफ्तार, 5 की तलाश
पूछताछ में वन विभाग के अनुसार कुल 11 लोगों के समूह के शिकार के लिए करंट वाला तार बिछाने में शामिल होने की जानकारी सामने आई। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान समीर टोप्पो, अगसतुस एक्का, रूपेश एक्का, दिनेश राम, सलिंद्र राम और तरसियुस राम के रूप में हुई है।
वन विभाग के मुताबिक हाथी की मौत के बाद तार हटाकर साक्ष्य छिपाने का प्रयास किया गया था। पांच अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। सभी छह गिरफ्तार आरोपितों को चिकित्सीय परीक्षण के बाद 25 सितंबर की शाम न्यायालय में पेश किया गया।
पोस्टमार्टम के बाद फोरेंसिक जांच
मृत हाथी का निर्धारित प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कराया गया। सरगुजा से पहुंचे पशु चिकित्सक डॉ. अजीत पांडेय और स्थानीय चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। आवश्यक फोरेंसिक नमूने सुरक्षित रखे गए हैं।
वन विभाग के अनुसार हाथी की मौत के वास्तविक कारण की अंतिम पुष्टि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी। मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई की जा रही है।









