दुर्ग और रायपुर मंडल के 14 एसी कोच तकनीशियन व सहायकों को मिलेगा लाभ | कैट, जबलपुर के आदेश को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार
रेलवे और केंद्र सरकार को हाईकोर्ट से झटका
बिलासपुर: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में एसी कोच में काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य भत्ता देने के मामले में हाईकोर्ट ने रेलवे प्रशासन और केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की युगलपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), जबलपुर पीठ के आदेश को बरकरार रखा है।
इस फैसले से दुर्ग और रायपुर रेल मंडल में कार्यरत 14 एसी कोच तकनीशियन और सहायकों को अतिरिक्त कार्य भत्ता मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
कैट ने 2025 में दिया था भत्ता देने का आदेश
कर्मचारियों ने अतिरिक्त कार्य भत्ता देने की मांग को लेकर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर में आवेदन किया था। अधिकरण ने 25 सितंबर 2025 को कर्मचारियों के पक्ष में आदेश देते हुए भत्ता देने का निर्देश दिया था।
रेलवे प्रशासन ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने रेलवे और केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए कैट के आदेश को बरकरार रखा है।
रेलवे ने 1985 के परिपत्र का दिया हवाला

रेलवे की ओर से उप सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि कैट ने रेल मंत्रालय के 27 जून 1985 के परिपत्र में निर्धारित व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
इस परिपत्र में एसी कोच कर्मचारियों के काम के घंटे और अतिरिक्त कार्य भत्ते की गणना से संबंधित प्रावधान हैं। रेलवे की ओर से कहा गया कि पहले के मामलों में इस परिपत्र को चुनौती नहीं दी गई थी, इसलिए पुराने फैसलों के आधार पर कर्मचारियों को भत्ता देने का आदेश उचित नहीं है।
कर्मचारियों ने कानूनी आधार पर रखा पक्ष
कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि एसी कोच कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य भत्ता दिए जाने का कानूनी सिद्धांत पहले ही तय हो चुका है।
हाईकोर्ट ने रेलवे और केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर कैट के आदेश को बरकरार रखा। इससे संबंधित कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य भत्ता देने के मामले में राहत मिली है।
