पोटियाडीह के लीनेश साहू की आत्महत्या मामले में अपर सत्र न्यायालय का फैसला | पत्नी, सास-ससुर, डेढ़सास और साली पर दूसरे धर्म को अपनाने के लिए दबाव बनाने का आरोप साबित
आत्महत्या मामले में पांच दोषियों को सजा
धमतरी: जिले के पोटियाडीह गांव में युवक की आत्महत्या से जुड़े मामले में अपर सत्र न्यायालय ने पांच आरोपितों को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पत्नी, सास-ससुर, डेढ़सास और साली को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और 3(5) के तहत दोषी ठहराया। सभी पर 500-500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
न्यायालयीन जानकारी के अनुसार, मामला लीनेश कुमार साहू की आत्महत्या से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष का कहना था कि मृतक और उसके माता-पिता पर दूसरे धर्म को अपनाने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था, जिससे परेशान होकर युवक ने आत्महत्या कर ली।
दिसंबर 2024 में हुई थी घटना

प्रकरण के अनुसार, लीनेश के चाचा खूबचंद साहू ने थाना अर्जुनी में सूचना दी थी कि उनका भतीजा 6 दिसंबर 2024 की रात से 7 दिसंबर की सुबह के बीच अपने घर के ऊपरी कमरे में फांसी पर लटका मिला।
सूचना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। घटनास्थल से मृतक का मोबाइल फोन मिला। जांच में मोबाइल के व्हाट्सएप स्टेटस और एक रिश्तेदार को भेजे गए संदेश सामने आए, जिनमें मृतक ने अपनी आत्महत्या के लिए पत्नी और ससुराल पक्ष के लोगों को जिम्मेदार बताया था।
पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर संदेशों के स्क्रीनशॉट और अन्य साक्ष्य संकलित किए।
शादी के कुछ महीने बाद शुरू हुआ विवाद
जांच के अनुसार, लीनेश साहू का विवाह सितंबर 2023 में करुणा साहू के साथ हुआ था। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि शादी के करीब तीन-चार महीने बाद पत्नी करुणा साहू, सास गौरी साहू, ससुर राजकुमार साहू, डेढ़सास किरण साहू और साली कनिष्का साहू कथित तौर पर लीनेश और उसके माता-पिता पर दूसरे धर्म को अपनाने के लिए दबाव डालने लगे।
आरोप के अनुसार, धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर उनके साथ विवाद किया जाता था। पुलिस ने गवाहों के बयान और मोबाइल से मिले संदेशों सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाई सजा
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश अर्चना भास्कर की अदालत में हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने राजकुमार साहू, गौरी साहू, करुणा साहू, किरण साहू और कनिष्का साहू को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 500-500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
शासन की ओर से लोक अभियोजक गितेश प्रजापति ने मामले की पैरवी की।
