लैलूंगा के किसानों ने बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत टिकरा जमीन पर लगाई सन की फसल, पात्र किसानों को कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का लाभ मिलने का प्रावधान
रायगढ़, 9 अक्टूबर 2026। खेती में बदलाव की शुरुआत खेत से होती है। रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के दो किसानों ने धान के बदले सन की खेती अपनाकर फसल विविधीकरण की दिशा में पहल की है। ग्राम केंदाटिकरा के सुखदेव सिदार और ग्राम लैलूंगा के चंद्रशेखर पटेल ने टिकरा जमीन पर बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत सन की फसल लगाई है।
दोनों किसानों के खेतों में लहलहाती फसल दूसरे किसानों का ध्यान भी वैकल्पिक खेती की ओर आकर्षित कर रही है। इस पहल का उद्देश्य कम पानी वाली जमीन का बेहतर उपयोग करना और बीज उत्पादन के माध्यम से किसानों के लिए आमदनी के अवसर बढ़ाना है।
सन की खेती से बीज उत्पादन के साथ अन्य उपयोग

सन की फसल का उपयोग केवल बीज उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके रेशों से रस्सियां बनाई जाती हैं। इनका इस्तेमाल बोरियों और खाट की बुनाई सहित विभिन्न कार्यों में किया जाता है।
इसके अलावा, सन की हरी फसल को खेत में मिलाकर हरी खाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम करने में मदद मिल सकती है।
धान के बदले दूसरी फसलें अपनाने पर जोर
जिला प्रशासन किसानों को धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसका उद्देश्य जमीन की प्रकृति और पानी की उपलब्धता के अनुसार खेती को बढ़ावा देना तथा किसानों को फसल विविधीकरण से जोड़ना है।
इसी पहल के तहत सुखदेव सिदार और चंद्रशेखर पटेल ने धान का रकबा घटाकर सन की खेती का विकल्प चुना है। बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत उत्पादित बीज को बीज निगम को उपलब्ध कराने का अवसर भी मिलेगा।
कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का प्रावधान
राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना के तहत धान के बदले निर्धारित वैकल्पिक फसल लेने वाले पात्र किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का लाभ देने का प्रावधान है।
दोनों किसानों ने धान का रकबा कम करके सन की खेती की है। हालांकि, योजना का लाभ उन्हें निर्धारित नियमों और पात्रता की शर्तें पूरी करने पर ही मिलेगा।
