कांकेर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ जिले की महिलाओं के जीवन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव ला रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम कराठी की रहने वाली श्रीमती लच्छंतीन बाई दरपट्टी आज स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन गई हैं।

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🔴 बिहान योजना से महिला बनी आत्मनिर्भर
🔴 स्व-सहायता समूह से जुड़कर शुरू किए कई रोजगार
🔴 बैंक ऋण और प्रशिक्षण से मिली नई पहचान
🔴 अब सालाना 1.45 लाख रुपये तक की हो रही आय
लच्छंतीन बाई ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और खेती के लिए अक्सर ब्याज पर ऋण लेना पड़ता था। आधुनिक खेती और स्वरोजगार की जानकारी भी नहीं थी।
बिहान योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर तुलसी स्व-सहायता समूह का गठन किया। नियमित बचत और बैठकों के साथ उन्हें समूह के माध्यम से आसानी से ऋण मिलने लगा। बाद में चक्रीय निधि, प्रोत्साहन राशि और आजीविका गतिविधियों के लिए बैंक से 1.20 लाख रुपये का ऋण भी मिला।
बिहान मिशन के अधिकारियों के मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से लच्छंतीन बाई ने चटिया मिल (लघु प्रसंस्करण इकाई), मशरूम उत्पादन, मुर्गी पालन और कृषि कार्य शुरू किए। इन गतिविधियों से उन्हें लगभग 12 हजार रुपये प्रतिमाह और करीब 1.45 लाख रुपये वार्षिक आय हो रही है।
आज उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं बेहतर हो गई है। बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से हो रही है और परिवार आत्मनिर्भर बन चुका है। लच्छंतीन बाई की सफलता की कहानी अब ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
