Highlight Lines
🔴 हाईकोर्ट ने 20 साल की सजा का आदेश किया रद्द
🔴 DNA रिपोर्ट में आरोपी जैविक पिता नहीं पाया गया
🔴 पीड़िता के स्वेच्छा से साथ जाने का भी अदालत ने किया उल्लेख
🔴 फास्ट ट्रैक POCSO कोर्ट का फैसला निरस्त, आरोपी बरी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने POCSO और अपहरण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय द्वारा सुनाई गई 20 वर्ष की सजा को निरस्त कर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने DNA रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह निर्णय दिया।

मामला वर्ष 2022 का है, जब रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र से 17 वर्षीय छात्रा लापता हुई थी। बाद में उसे छिंदवाड़ा से बरामद किया गया। जांच के दौरान छात्रा गर्भवती पाई गई और गर्भपात के बाद भ्रूण का DNA परीक्षण कराया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि आरोपी लक्ष्मीनारायण उर्फ लक्ष्मण भ्रूण का जैविक पिता नहीं है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि युवती आरोपी के साथ अपनी इच्छा से विभिन्न शहरों में गई थी और यात्रा के दौरान कहीं भी विरोध या शिकायत नहीं की। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने बहला-फुसलाकर या जबरन युवती को अपने साथ ले गया था।
हाईकोर्ट ने माना कि DNA रिपोर्ट ने अभियोजन के दावों पर गंभीर संदेह पैदा किया है और अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसके बाद अदालत ने फास्ट ट्रैक POCSO कोर्ट का 27 सितंबर 2024 का फैसला रद्द करते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया तथा निर्देश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
