परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में ब्लैक स्पॉट सुधार, दुर्घटना के बाद त्वरित उपचार, ग्रामीण बस सेवा विस्तार और आधुनिक ड्राइविंग टेस्ट पर जोर
- 1. सड़क हादसों में मौतों पर रोक लगाने के लिए सभी संबंधित विभाग मिशन मोड में काम करेंगे।
- 2. प्रदेश के 23 ब्लैक स्पॉट पर चल रहे सुधार कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
- 3. 13 जिलों के 106 मार्गों पर संचालित 107 बस सेवाओं के विस्तार और बेहतर परिवहन व्यवस्था पर जोर दिया गया।

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में परिवहन विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए प्रदेश में सुरक्षित, सुगम और आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। बैठक में सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को कम करने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि सड़क हादसों में होने वाली संभावित जनहानि को रोकना होना चाहिए। इसके लिए दुर्घटना से पहले रोकथाम और हादसे के बाद त्वरित सहायता एवं उपचार, दोनों स्तरों पर व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
ब्लैक स्पॉट पर तेजी से होगा सुधार
मुख्यमंत्री ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय तेजी से करने को कहा। बैठक में बताया गया कि राज्य के 23 ब्लैक स्पॉट में सुधार की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। उन्होंने इन कार्यों को जल्द पूरा करने और दुर्घटनाओं के कारणों का नियमित विश्लेषण करने के निर्देश दिए।
दुर्घटना के बाद शुरुआती समय को महत्वपूर्ण बताते हुए एंबुलेंस, अस्पताल और उपचार व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया।
राहवीर और पीएम-राहत योजना का प्रचार
सड़क दुर्घटना पीड़ितों की तत्काल मदद के लिए पीएम-राहत योजना और राहवीर योजना का व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक ₹1.50 लाख तक कैशलेस उपचार का प्रावधान है।
दूरस्थ गांवों तक पहुंचे बस सेवा
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का विस्तार करने को कहा। वर्तमान में योजना के तहत 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसें संचालित होने की जानकारी बैठक में दी गई।
दूरस्थ और सार्वजनिक परिवहन से वंचित क्षेत्रों का सर्वे कर नए मार्ग शुरू करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए। कोंटा-जगरगुंडा बस सेवा का उदाहरण देते हुए बताया गया कि पहले करीब छह घंटे लगने वाली यात्रा अब लगभग 45 मिनट में पूरी हो रही है।
फिटनेस जांच और ड्राइविंग टेस्ट में तकनीक
वाहनों की फिटनेस जांच को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने पर भी जोर दिया गया। ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की व्यवस्था की समीक्षा के साथ 15 वर्ष पुराने वाहनों के नियमानुसार नवीनीकरण और फिटनेस प्रावधानों के पालन के निर्देश दिए गए।
ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में ई-ट्रैक के जरिए CCTV और सेंसर आधारित कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई।
HSRP, चालान और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
मुख्यमंत्री ने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) अभियान में तेजी लाने, लंबित चालानों की रिकवरी बढ़ाने और आधुनिक चालान प्रणाली के प्रभावी उपयोग के निर्देश दिए।
इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन नीति की समीक्षा करते हुए पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। पर्यटन स्थलों तक बेहतर सार्वजनिक परिवहन और कनेक्टिविटी विकसित करने की संभावनाओं पर भी काम करने के निर्देश दिए गए।
