वनांचल क्षेत्रों में रात होते ही खेतों का रुख कर रहे हाथी, तमनार से धरमजयगढ़ तक फसलों को नुकसान; वन विभाग की टीमें निगरानी और नुकसान के आकलन में जुटीं।
- 1. रायगढ़ में हाथियों का कहर | 16 किसानों की धान फसल रौंदी
- 2. 130 हाथियों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता | खेतों में पहुंचकर फसल बर्बाद कर रहे हाथी
- 3. रात होते ही खेतों में पहुंच रहा हाथियों का दल | रायगढ़ के कई गांव प्रभावित

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के वनांचल क्षेत्रों में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शाम ढलने के बाद हाथियों के दल खेतों की ओर पहुंच रहे हैं, जिससे खड़ी धान की फसल को नुकसान हो रहा है। हालिया रिपोर्ट में भी रायगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में हाथियों के खेतों तक पहुंचने और फसल नुकसान की जानकारी सामने आई है।
16 किसानों की फसल को नुकसान
रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल के अलग-अलग इलाकों में हाथियों ने अब तक 16 किसानों की खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। प्रभावित क्षेत्रों में तमनार रेंज का सामारूमा, घरघोड़ा का कमतरा और धरमजयगढ़ क्षेत्र के नलकालो, प्रेमनगर, मेढरमार, लैलूंगा और गमेकेला शामिल हैं।
पीड़ित किसानों में विजय राय, चैतराम, प्रशांत भगत, कुसुम और श्रवण कुमार समेत अन्य ग्रामीण शामिल हैं। हाथियों के खेतों में पहुंचने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
130 हाथियों की मौजूदगी
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में कुल करीब 130 हाथी मौजूद हैं। इनमें 39 नर, 62 मादा और 29 शावक शामिल हैं।
इतनी बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी के कारण वनांचल गांवों में ग्रामीणों की चिंता बढ़ी हुई है। हाल के दिनों में रायगढ़ के सामारूमा क्षेत्र में हाथियों के दल के सड़क तक पहुंचने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
हाथी मित्र दल और ट्रेकर्स की निगरानी
स्थिति पर नजर रखने के लिए हाथी मित्र दल और ट्रेकर्स की टीमें लगातार हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रख रही हैं। प्रभावित गांवों में मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
वन विभाग की टीमें खेतों में हुए नुकसान का आकलन कर रही हैं, ताकि आगे की मुआवजा प्रक्रिया पूरी की जा सके। ग्रामीणों से अपील की गई है कि शाम और रात के समय अकेले जंगल या हाथी प्रभावित क्षेत्रों की ओर न जाएं।
