कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने शत-प्रतिशत उपस्थिति, पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य जांच और सीसीटीवी निगरानी के दिए निर्देश; सुविधाओं के लिए राशि भी जारी

सारंगढ़-बिलाईगढ़, 16 अक्टूबर 2026। जिले में आदिम जाति विकास विभाग के आश्रम-छात्रावासों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभागीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की अनुपस्थिति और मूलभूत सुविधाओं में कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारियों और छात्रावास अधीक्षकों को विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पौष्टिक भोजन और सुरक्षित आवासीय वातावरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राज्य शासन के निर्देशों के अनुपालन में आश्रम-छात्रावासों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और रखरखाव संबंधी व्यवस्थाओं के लिए 50-50 हजार रुपये तथा 25-25 हजार रुपये की राशि जारी की गई है।
भोजन, पेयजल और सीसीटीवी व्यवस्था पर जोर
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति के आधार पर भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बिजली और परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
बच्चों की सुरक्षा के लिए छात्रावासों में लगे सीसीटीवी कैमरों को चौबीसों घंटे चालू रखने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर उदासीनता नहीं होनी चाहिए।
नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और तत्काल उपचार
स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने आश्रम-छात्रावासों में नियुक्त चिकित्सकों के माध्यम से विद्यार्थियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने को कहा। इसके लिए निर्धारित कैलेंडर तैयार करने और जांच रिपोर्ट को अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि किसी विद्यार्थी में स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आने पर तत्काल उपचार की व्यवस्था की जाए। बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ उन्हें स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं
शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए कलेक्टर ने प्रत्येक विद्यार्थी की पढ़ाई और प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। पढ़ाई में कमजोर बच्चों को चिन्हित कर उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं संचालित करने को कहा गया।
उन्होंने शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार अध्यापन कराने, त्रैमासिक परीक्षा परिणामों का विश्लेषण करने और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। अर्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम हासिल करने के लिए शिक्षकों और अधीक्षकों को समन्वय के साथ काम करने को कहा गया।
छात्रावासों का होगा आकस्मिक निरीक्षण
कलेक्टर श्रीमती साहू ने उपस्थिति, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण, सामग्री वितरण, भंडार और निरीक्षण से संबंधित सभी पंजियों को नियमित रूप से अद्यतन रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार, जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड स्तरीय अधिकारियों को क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान आश्रम-छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण करने को कहा। निरीक्षण में विद्यार्थियों की उपस्थिति, भोजन की गुणवत्ता, शैक्षणिक गतिविधियों, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की जांच की जाएगी। पाई गई कमियों को समय-सीमा में दूर कराने के निर्देश भी दिए गए।
बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर
कलेक्टर ने कहा कि आश्रम-छात्रावास केवल रहने और भोजन की व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। यहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा और सकारात्मक वातावरण की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के सहायक आयुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, आश्रम-छात्रावासों के अधीक्षक तथा संबंधित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
