एकीकृत बागवानी विकास मिशन से मिला अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन, ड्रिप सिंचाई से करेला, बरबटी, लौकी और मिर्च की खेती में बढ़ा उत्पादन

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के जनजातीय बाहुल्य नारायणपुर जिले में आधुनिक कृषि तकनीकों और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से किसानों की खेती को नई दिशा मिल रही है। पारंपरिक और कम मुनाफे वाली फसलों के साथ अब किसान व्यावसायिक सब्जी उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं। विकासखंड नारायणपुर के ग्राम केरलापाल निवासी किसान कालेंद्र कुमेटी इस बदलाव की एक मिसाल बनकर सामने आए हैं।
कालेंद्र कुमेटी ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना का लाभ लेकर आधुनिक तरीके से सब्जी उत्पादन शुरू किया। ड्रिप सिंचाई, उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन के जरिए उन्होंने खेती से होने वाली आमदनी को बढ़ाने में सफलता हासिल की है।
पहले पारंपरिक खेती पर थे निर्भर
कालेंद्र कुमेटी पहले पूरी तरह पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। मेहनत और लागत के बावजूद उन्हें खेती से सीमित मुनाफा ही मिल पाता था। ऐसे में बेहतर आमदनी के लिए खेती के नए तरीकों को अपनाना उनके लिए जरूरी था।
इसी दौरान उन्होंने जिला उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें आधुनिक सब्जी उत्पादन, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और उन्नत बीज के उपयोग के बारे में जानकारी दी।
योजना के तहत मिला अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन
वर्ष 2025-26 में कालेंद्र को एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत लौकी और मिर्च की खेती के लिए अनुदान का लाभ मिला। इसके साथ ही उद्यानिकी विभाग की ओर से उन्हें खेती की आधुनिक तकनीकों को लेकर आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया।
सरकारी सहायता और विभागीय सलाह से उत्साहित होकर उन्होंने अपने खेत में उद्यानिकी फसलों का विस्तार किया।
खेत में लहलहा रही करेला, बरबटी, लौकी और मिर्च
आज कालेंद्र कुमेटी के खेत में करेला, बरबटी, लौकी और मिर्च की फसलें लहलहा रही हैं। उन्होंने फसलों के बेहतर प्रबंधन के लिए ड्रिप तकनीक को अपनाया है।
ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पानी और उर्वरक का संतुलित उपयोग करने में मदद मिली। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार देखने को मिला।
खेती से सालाना 2 से 3 लाख रुपये तक की आमदनी
आधुनिक तकनीक और बेहतर फसल प्रबंधन का फायदा कालेंद्र की आय पर भी दिखाई दे रहा है। वे अब उद्यानिकी फसलों से प्रतिवर्ष करीब 2 से 3 लाख रुपये तक की आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
पारंपरिक खेती की तुलना में व्यावसायिक सब्जी उत्पादन ने उनके लिए आय का नया और बेहतर अवसर तैयार किया है।
आसपास के किसानों ने भी अपनाया सब्जी उत्पादन
कालेंद्र की सफलता का प्रभाव उनके गांव तक सीमित नहीं रहा। उनकी खेती और आमदनी से प्रेरित होकर आसपास के गांवों के करीब 10 से 15 किसान भी अब पारंपरिक खेती के साथ व्यावसायिक सब्जी उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं।
इससे क्षेत्र में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और उद्यानिकी फसलों के प्रति किसानों की रुचि बढ़ रही है।
सरकारी योजना और मेहनत से खेती बनी लाभ का जरिया
कालेंद्र कुमेटी की सफलता यह दिखाती है कि शासकीय योजनाओं का लाभ, तकनीकी मार्गदर्शन और किसान की मेहनत एक साथ मिलकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं।
आधुनिक सिंचाई तकनीक, उन्नत बीज और बाजार की जरूरत के अनुसार सब्जियों का उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकता है। नारायणपुर के कालेंद्र कुमेटी की खेती इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है।
