रायगढ़ जिले के छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर स्थित कांदादोड़ा गांव में एक परिवार उस समय दहशत में आ गया, जब लगातार तीन दिनों तक घर से बेबी कोबरा निकलने लगे। पहले दिन एक, दूसरे दिन एक और तीसरे दिन फिर सांप का बच्चा दिखाई देने पर परिवार ने तुरंत स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दी।
मौके पर पहुंची टीम ने घर की नींव के पास खुदाई शुरू की। करीब दो फीट नीचे पहुंचने पर सभी हैरान रह गए। वहां कोबरा के 27 अंडे मिले, जिनमें से अधिकांश से बच्चे निकल चुके थे। रेस्क्यू टीम ने 10 बेबी कोबरा को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया, जबकि बाकी बच्चे पहले ही आसपास निकल चुके थे।
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🔴 रायगढ़ के घर की नींव से मिले कोबरा के 27 अंडे
🔴 रेस्क्यू टीम ने 10 बेबी कोबरा को सुरक्षित बचाया
🔴 रायगढ़ में बेडरूम से निकला 5 फीट लंबा नाग
🔴 सर्पदंश से पिता-बेटी समेत 3 लोगों की मौत
🔴 मानसून में बढ़ा सांपों का खतरा, बरतें सावधानी
इसी बीच रायगढ़ शहर के अतरमुड़ा इलाके में भी एक पांच फीट लंबा भारतीय नाग एक घर के बेडरूम में घुस गया। सूचना मिलने पर स्नेक रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक कोबरा को पकड़ा और सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

उधर मानसून के साथ प्रदेश में सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। बलरामपुर जिले के डंभाटोली गांव में जमीन पर सो रहे पिता और चार वर्षीय बेटी को जहरीले सांप ने डस लिया। परिवार पहले उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराता रहा। हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया, जबकि इलाज के दौरान पिता ने भी दम तोड़ दिया।
वहीं सरगुजा जिले के सकरिया गांव में 13 वर्षीय आसमनी एक्का को रात में जमीन पर सोते समय करैत सांप ने डस लिया। अस्पताल ले जाने के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में सांप अपने बिलों से निकलकर घरों और आबादी वाले इलाकों की ओर आ जाते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। यदि घर में सांप दिखाई दे तो खुद पकड़ने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें।
सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू इलाज पर भरोसा करने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना ही सबसे सुरक्षित और जीवन बचाने वाला कदम है।
