कुनकुरी की सिम्मी ने ऋण से शुरू किया पशुपालन व्यवसाय, बढ़ी आमदनी तो अब ईंट निर्माण मशीन लगाने की दिशा में बढ़ाया कदम

कुनकुरी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के बल पर न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि नए रोजगार के साधन भी विकसित कर रही हैं। कुनकुरी निवासी सिम्मी कुजूर की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है।
आर्थिक परेशानियों के बीच समूह से मिला सहारा
सिम्मी कुजूर के लिए एक समय परिवार की जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। आर्थिक परेशानियों के बीच स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया। समूह के माध्यम से उन्हें ऋण की सुविधा मिली, जिसका उपयोग उन्होंने पशुपालन व्यवसाय शुरू करने में किया।
सिम्मी ने मेहनत और लगन के साथ पशुपालन को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उनकी आमदनी बढ़ने लगी और परिवार को आर्थिक संबल मिलने लगा। इससे सिम्मी का आत्मविश्वास भी बढ़ा और उन्होंने अपनी आजीविका को और आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
पशुपालन के बाद अब ईंट निर्माण की तैयारी
पशुपालन व्यवसाय में सफलता मिलने के बाद सिम्मी ने दोबारा ऋण लेकर अब ईंट निर्माण की मशीन लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका उद्देश्य परिवार के लिए आय का एक अतिरिक्त साधन तैयार करना है।
सिम्मी का मानना है कि ईंट निर्माण का व्यवसाय शुरू होने से उनकी आमदनी बढ़ेगी और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत होगी। साथ ही इस गतिविधि के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
योजनाओं से मिला आत्मनिर्भर बनने का अवसर
सिम्मी कुजूर ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने और शासन की योजनाओं का लाभ मिलने से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला। समूह के माध्यम से मिले आर्थिक सहयोग ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने का हौसला दिया।
उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति में आए सकारात्मक बदलाव के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। सिम्मी ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने वाली ऐसी योजनाएं उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
मेहनत और अवसर से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर
सिम्मी कुजूर की सफलता यह संदेश देती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर, आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिले तो वे अपनी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान देने के साथ गांव की अर्थव्यवस्था को भी गति दे रही हैं।
पशुपालन से शुरुआत कर अब ईंट निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाने वाली सिम्मी की कहानी ग्रामीण महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।
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