एक साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में थे दोनों आरोपी, 100 से ज्यादा गवाहों के कारण सुनवाई में लग सकता है लंबा समय

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में आयोग की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने दोनों आरोपियों को नियमित जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद लंबे समय से न्यायिक हिरासत में चल रहे दोनों अधिकारियों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
एक साल से अधिक समय से जेल में थे दोनों आरोपी
सुप्रीम कोर्ट में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.बी. मुरेश और अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने दलील दी कि दोनों याचिकाकर्ता एक साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी द्वारा आरोप-पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले में 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लग सकता है। वकीलों ने तर्क दिया कि सुनवाई में होने वाली देरी आरोपियों की वजह से नहीं है, बल्कि अभियोजन की मंजूरी से जुड़ी औपचारिकताओं के कारण प्रक्रिया आगे बढ़ने में समय लग रहा है।
बचाव पक्ष ने वासनिक की भूमिका पर उठाए सवाल
बचाव पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा लगाए गए आरोपों में आरती वासनिक की सीधे तौर पर कोई प्रत्यक्ष भूमिका स्पष्ट नहीं होती। साथ ही, जिन अभ्यर्थियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिलने की बात कही गई है, उनकी नियुक्तियों पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।
इन दलीलों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों को नियमित जमानत देने का आदेश जारी किया।
2020 से 2022 की भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित CGPSC की भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कार में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों से जुड़े कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
मामले में भर्ती परीक्षाओं और इंटरव्यू की प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप सामने आने के बाद जांच शुरू की गई थी।
CBI कर रही है मामले की जांच
राज्य सरकार की सिफारिश के बाद मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी। जांच के दौरान एजेंसी ने कई स्थानों पर कार्रवाई करते हुए दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की थी।
इसी मामले में CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ भी जांच और कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है।
जमानत के बाद भी जारी रहेगी कानूनी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद आरती वासनिक और ललित गनवीर को राहत जरूर मिली है, लेकिन CGPSC भर्ती अनियमितता मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है। मामले में आगे गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जारी रहेंगी।
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