लोहण्डीगुड़ा के बड़ांजी में मुर्गीपालन योजना का शुभारंभ, 25 महिला किसानों को मिलेंगे 50-50 स्वस्थ देसी चूजे

देसी मुर्गीपालन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए कम लागत में आत्मनिर्भर स्वरोजगार का मजबूत जरिया बनता जा रहा है। बस्तर जिले के लोहण्डीगुड़ा विकासखंड के बड़ांजी क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं की आजीविका मजबूत करने के लिए मुर्गीपालन योजना के प्रथम चरण की शुरुआत की गई है। इसके तहत आजीविका सेवा केंद्र लोहण्डीगुड़ा के अंतर्गत नोडल आईएफसी लक्ष्यदीप महिला क्लस्टर संगठन, बड़ांजी की ब्रुडिंग इकाई में 600 देसी मुर्गी के चूजों की वैज्ञानिक ब्रुडिंग शुरू की गई है।
25 महिला किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्थायी स्वरोजगार से जोड़ना और परिवार की आय का अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है। योजना के तहत बड़ांजी क्षेत्र की 25 चयनित महिला किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। वैज्ञानिक ब्रुडिंग पूरी होने के बाद प्रत्येक महिला को 50-50 स्वस्थ देसी मुर्गी के चूजे वितरित किए जाएंगे।
वैज्ञानिक तरीके से होगी चूजों की देखभाल
ब्रुडिंग इकाई में सभी 600 चूजों को शुरुआती 15 दिनों तक वैज्ञानिक तरीके से रखा जाएगा। इस दौरान चूजों के लिए उचित तापमान, संतुलित दाना-पानी और आवश्यक टीकाकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। नियमित देखरेख के माध्यम से चूजों के बेहतर विकास और मृत्यु दर को न्यूनतम रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ब्रुडिंग प्रक्रिया का तकनीकी मार्गदर्शन आईएफसी एंकर, सीनियर सीआरपी और पशु सखी द्वारा किया जा रहा है। इससे महिला किसानों को मुर्गीपालन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी भी मिलेगी और आगे चूजों के पालन के दौरान उनकी बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जा सकेगी।
हर महिला को मिलेंगे 50 स्वस्थ देसी चूजे
15 दिनों की वैज्ञानिक ब्रुडिंग पूरी होने के बाद 25 चयनित महिला किसानों को 50-50 स्वस्थ देसी चूजे दिए जाएंगे। इस तरह प्रत्येक महिला अपने घर से ही देसी मुर्गीपालन की शुरुआत कर सकेगी।
कम संसाधनों में शुरू होने वाले इस व्यवसाय से महिलाओं को घरेलू आजीविका मजबूत करने का अवसर मिलेगा। मुर्गियों के पालन-पोषण और उनके उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।
महिला समूहों से मजबूत हो रही ग्रामीण आजीविका
आईएफसी परियोजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ तकनीकी प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ांजी में शुरू हुई 600 चूजों की यह पहल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, आजीविका संवर्धन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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