कोकड़ी में जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे ग्रामीण, पेसा एक्ट के उल्लंघन और अभयारण्य क्षेत्र में विकास की कमी का भी उठाया मुद्दा

कोकड़ी में 128 गांवों के ग्रामीणों की महापंचायत
गरियाबंद: उदंती-सीतानदी अभयारण्य क्षेत्र के 128 गांवों के ग्रामीणों ने गरियाबंद जिले के कोकड़ी गांव में महापंचायत आयोजित कर विस्थापन और नेशनल हाईवे पर 11 घंटे तक आवागमन बंद रखने के फैसले का विरोध किया। जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस महापंचायत में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखीं और निर्णय के खिलाफ आवाज उठाई।
महापंचायत में बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव और सिहावा विधायक अंबिका मरकाम सहित कई निर्वाचित जनप्रतिनिधि और सामाजिक पदाधिकारी मौजूद रहे।
विस्थापन की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
महापंचायत में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी नीति की पूरी जानकारी दिए बिना लोगों से विस्थापन के लिए सहमति ली जा रही है। उन्होंने अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया।
ग्रामीणों ने अभयारण्य क्षेत्र के गांवों में अपेक्षित विकास नहीं होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि विस्थापन से जुड़े निर्णयों में प्रभावित लोगों की समस्याओं और अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। महापंचायत में इन मुद्दों पर व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की बात भी कही गई।
11 घंटे हाईवे बंद रखने के फैसले पर भी आपत्ति
महापंचायत में शाम से सुबह सात बजे तक नेशनल हाईवे पर आवागमन अवरुद्ध रखने के फैसले का भी विरोध किया गया। ग्रामीणों ने इस व्यवस्था से आम लोगों को होने वाली परेशानियों पर चिंता जताई।
आदिवासी नेता महेंद्र नेताम ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, जिसके तहत टाइगर रिजर्व क्षेत्र में नेशनल हाईवे को 11 घंटे बंद रखने की व्यवस्था है। हालांकि, उन्होंने अब तक टाइगर रिजर्व से विस्थापित किए गए लोगों के लिए नीति नहीं बनने का मुद्दा उठाया।
नेताम के मुताबिक, विस्थापन से जुड़ी समस्याओं और हाईवे बंद रखने के निर्णय से संबंधित मुद्दों के समाधान के उद्देश्य से महापंचायत आयोजित की गई।
प्रस्ताव संसद, विधानसभा और जिला पंचायत में रखने का निर्णय
महापंचायत में पारित प्रस्तावों को संसद, विधानसभा और जिला पंचायत के पटल पर रखने तथा उनके अनुपालन के लिए प्रयास करने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने विस्थापन से जुड़े मामलों, पेसा एक्ट के पालन और अभयारण्य क्षेत्र में विकास की जरूरतों पर ध्यान देने की मांग उठाई।
महापंचायत में शामिल जनप्रतिनिधियों और सामाजिक पदाधिकारियों ने इन मुद्दों को संबंधित मंचों तक पहुंचाने की बात कही। अब इन मांगों पर संबंधित पक्षों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।
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गरियाबंद
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