कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर भाजपा के खिलाफ नारेबाजी, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; मनीष सिसोदिया समेत कई नेता हिरासत में

चुनावी पारदर्शिता को लेकर AAP का विरोध
चंडीगढ़: चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने चंडीगढ़ में प्रदर्शन किया। पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कथित ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों के आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
पार्टी नेताओं का कहना था कि लोकतंत्र में प्रत्येक मतदाता के वोट का महत्व है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने से जुड़े सवालों का पारदर्शी और तथ्यात्मक जवाब दिया जाना चाहिए।
कुलजीत सिंह रंधावा और गुरप्रीत सिंह विर्क भी शामिल
प्रदर्शन में विधायक कुलजीत सिंह रंधावा और नगर परिषद प्रधान गुरप्रीत सिंह विर्क ने भी हिस्सा लिया। पार्टी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
AAP ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। पार्टी ने इन मुद्दों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने और शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई की मांग की।
बैरिकेडिंग के बाद धक्का-मुक्की, नेता हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। जब प्रदर्शनकारी पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ने लगे, तो पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें आगे जाने से रोक दिया।
इसके बाद मौके पर तनाव और धक्का-मुक्की की स्थिति बनने की खबर सामने आई। समाचार एजेंसियों के अनुसार, मनीष सिसोदिया सहित AAP के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। वहीं, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है।
SIR प्रक्रिया को लेकर भी उठाए सवाल
इस राजनीतिक विवाद में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की समीक्षा कर नियमानुसार नाम जोड़ने, हटाने और आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।
AAP ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर उठाए गए सवालों पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित मतदाता सूची, संशोधन रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों का अध्ययन जरूरी है।
भाजपा और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक टकराव
प्रदर्शन के दौरान AAP नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
पार्टी की ओर से लोकतांत्रिक अधिकारों की स्थिति को लेकर भी तीखी राजनीतिक टिप्पणियां की गईं। ये बयान AAP के आरोप और राजनीतिक रुख को दर्शाते हैं। कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में अनियमितताओं की सत्यता का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक जवाबों और जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
चंडीगढ़ में हुआ यह प्रदर्शन AAP और भाजपा के बीच चुनावी पारदर्शिता को लेकर जारी राजनीतिक टकराव का हिस्सा बनकर सामने आया। अब मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
