नवंबर में धान खरीदी की तैयारियों के बीच 1 नवंबर से खरीदी शुरू करने की मांग, एग्रीस्टेक और सह-खातेदारों के सत्यापन पर भी उठे सवाल

पांच साल में बढ़ा धान खरीदी का दायरा
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू होने से पहले ही सियासी घमासान तेज हो गया है। पिछले पांच खरीफ विपणन वर्षों में राज्य में धान खरीदी का दायरा लगातार बढ़ा है। वर्ष 2025-26 में 31 जनवरी 2026 तक करीब 142 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। इस दौरान करीब 25.24 लाख किसानों ने धान बेचा और लगभग 33,149 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
वर्ष 2024-25 में करीब 149.25 लाख मीट्रिक टन, 2023-24 में 144.92 लाख मीट्रिक टन, 2022-23 में 107.53 लाख मीट्रिक टन और 2021-22 में करीब 97.97 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी।
एग्रीस्टेक और डिजिटल पंजीयन पर जोर
इस बार धान खरीदी की तैयारी में एग्रीस्टेक फार्मर आईडी और डिजिटल रिकॉर्ड पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संयुक्त खातों में दर्ज सह-खातेदारों के लिए सहमति और सत्यापन की प्रक्रिया भी जरूरी की गई है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल पंजीयन और बायोमेट्रिक सत्यापन से वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी और फर्जी पंजीयन जैसी शिकायतों पर रोक लगेगी। वहीं किसान संगठन का आरोप है कि सह-खातेदारों की सहमति और सत्यापन की प्रक्रिया कई किसानों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग
छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य वेगेंद्र कुमार सोनबेर ने धान खरीदी 1 नवंबर से शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि अक्टूबर के अंत तक बड़ी मात्रा में धान तैयार हो जाता है और किसानों को दीपावली के आसपास मजदूरी व अन्य जरूरतों के लिए पैसों की आवश्यकता होती है।
किसान संगठन का तर्क है कि खरीदी में देरी होने पर किसान निजी कारोबारियों को कम कीमत पर धान बेचने के लिए मजबूर हो सकते हैं। संगठन ने 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस से धान खरीदी शुरू करने की परंपरा बनाने की मांग की है।
MSP और बकाया राशि को लेकर भी सवाल
किसान संगठन ने धान के समर्थन मूल्य और किसानों को मिलने वाली राशि को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि केंद्र के बढ़े समर्थन मूल्य का पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंचा है और प्रति क्विंटल करीब 398 रुपये के अंतर की राशि का भुगतान किया जाना चाहिए।
संगठन ने वर्ष 2023 से जुड़ी चौथी किस्त की बकाया राशि जारी करने की मांग भी उठाई है।
कांग्रेस ने खरीदी व्यवस्था पर सरकार को घेरा
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने एग्रीस्टेक, गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसी व्यवस्थाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नई प्रक्रियाओं के कारण किसानों के सामने धान बेचने में नई अड़चनें पैदा हो सकती हैं।
कांग्रेस ने धान खरीदी के बाद उसके उठाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि समय पर उठाव नहीं होने से बारिश, नमी और भंडारण से जुड़े नुकसान की आशंका बढ़ती है। कांग्रेस ने दीपावली से पहले किसानों का धान खरीदे जाने की मांग की है।
सरकार का दावा—360 नए खरीदी केंद्र तैयार
सरकार का दावा है कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी को सुचारू बनाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। किसानों की सुविधा के लिए 360 नए धान खरीदी केंद्र शुरू किए गए हैं। सरकार ने खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त बारदाने और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी का भी दावा किया है।
भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता और सांसद संतोष पांडे का कहना है कि सरकार ने किसानों के हित में कई फैसले लिए हैं। उनका कहना है कि प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी और किसानों को अंतर की राशि देने की व्यवस्था की गई है।
टोकन, तौल और उठाव भी बड़ी चुनौती
वरिष्ठ पत्रकार राम अवतार तिवारी के मुताबिक धान खरीदी में सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था महत्वपूर्ण है। टोकन, तौल, बारदाने और खरीदे गए धान के समय पर उठाव से जुड़ी शिकायतें हर साल सामने आती हैं।
उनका कहना है कि खरीदी केंद्रों से धान का समय पर उठाव कर मिलर्स तक पहुंचाना जरूरी है। इससे भंडारण के दौरान बारिश, नमी और अन्य कारणों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
इस बार किसानों के लिए क्या बदलेगा?
धान खरीदी को लेकर इस बार सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ लाखों किसानों से समय पर धान खरीदना है, तो दूसरी तरफ एग्रीस्टेक और डिजिटल सत्यापन जैसी नई व्यवस्थाओं को जमीन पर आसान बनाना है।
किसान संगठन 1 नवंबर से खरीदी, समय पर भुगतान और प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग कर रहा है। कांग्रेस भी समय पर खरीदी और उठाव को लेकर सरकार पर दबाव बना रही है। वहीं सरकार नए खरीदी केंद्रों और डिजिटल व्यवस्था के जरिए प्रक्रिया को बेहतर बनाने का दावा कर रही है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि धान खरीदी की शुरुआत कब होती है और नई व्यवस्था किसानों के लिए कितनी आसान साबित होती है।
