दूसरे चरण में 8 जिलों के 85 आदिवासी विकासखंड शामिल | 60 से 80 नई बसों के संचालन का प्रस्ताव
- ग्रामीण बस सेवा के दूसरे चरण में 4,368 गांवों को जोड़ने की तैयारी
- 85 आदिवासी विकासखंडों में 60 से 80 नई बसें चलाने का प्रस्ताव
- दिसंबर तक बस सेवा शुरू होने की उम्मीद, 14.57 लाख लोगों को लाभ
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना को और व्यापक बनाने की तैयारी है। योजना के दूसरे चरण में आठ नए जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों में आने वाले 85 आदिवासी विकासखंडों को शामिल किया जाएगा। इन क्षेत्रों के नियमित बस सुविधा से वंचित 4,368 गांवों को योजना के दायरे में लाने की तैयारी है। सरकार को उम्मीद है कि इन गांवों में दिसंबर तक बस सेवा शुरू हो सकती है।

आठ जिलों में पहुंचेगी बस सेवा
दूसरे चरण में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बालोद, गरियाबंद, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, रायगढ़, कोरबा और धमतरी जिले शामिल किए गए हैं। इन जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों के गांवों को नियमित यात्री बस सेवा से जोड़ने की योजना है।
दूसरे चरण के तहत 60 से 80 बसों के संचालन का प्रस्ताव है। योजना के विस्तार से करीब 14.57 लाख लोगों को परिवहन सुविधा मिलने की संभावना है।
एक साल में 850 गांवों तक पहुंची बस
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से हुई थी। इसका शुभारंभ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में किया था।
शुरुआत में 34 मार्गों पर बस सेवा शुरू कर करीब 250 गांवों को जोड़ा गया था। एक साल के भीतर योजना का विस्तार होकर अब 106 चयनित मार्गों पर 107 बसों का संचालन किया जा रहा है। इन बसों के माध्यम से 850 ऐसे गांवों तक नियमित यात्री बस सेवा पहुंच चुकी है, जहां पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
5,300 किलोमीटर के मार्गों पर संचालन
योजना के तहत संचालित बसों ने एक वर्ष में करीब 24 लाख किलोमीटर की दूरी तय की है। वर्तमान में बसें प्रतिदिन लगभग 17,500 किलोमीटर चल रही हैं। अधिसूचित मार्गों की कुल लंबाई करीब 5,300 किलोमीटर है।
इन मार्गों की लंबाई 14 से 105 किलोमीटर तक है और अधिकांश मार्गों पर रोजाना दो ट्रिप संचालित की जा रही हैं। इससे ग्रामीणों को जिला और ब्लॉक मुख्यालय के साथ स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में सुविधा मिल रही है।
बस्तर और सरगुजा में 107 बसें
योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया था। बस्तर संभाग में 51 मार्गों पर 50 बसें और सरगुजा संभाग में 55 मार्गों पर 57 बसें संचालित हैं।
बस्तर संभाग के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जिलों में बस सेवाएं संचालित हो रही हैं। वहीं सरगुजा संभाग में सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के विभिन्न मार्गों पर बसें चल रही हैं।
कोंटा-जगरगुंडा मार्ग से ग्रामीणों को राहत
कोंटा से जगरगुंडा के करीब 83 किलोमीटर लंबे मार्ग पर बस सेवा शुरू होने से ग्रामीणों के आवागमन में सुविधा बढ़ी है। पहले इस क्षेत्र के लोग सीमित परिवहन साधनों पर निर्भर थे। नियमित बस सेवा से शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।
दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना के एक वर्ष पूरे होने पर कहा कि सुदूर गांवों के नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच का समान अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार ग्रामीण बस सेवा योजना इसी उद्देश्य को जमीन पर लागू करने का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले नियमित यात्री बस नहीं पहुंचती थी, वहां अब ग्रामीण तय समय पर बसों के माध्यम से जरूरी स्थानों तक पहुंच पा रहे हैं।
