2.5 एकड़ खेत को मिली स्थायी सिंचाई सुविधा, डबरी में मछली पालन शुरू कर किसान ने पहले ही साल कमाए करीब 5 हजार रुपए
- 1. आजीविका डबरी से बदली किसान की जिंदगी | 2.5 एकड़ खेत को मिली सिंचाई सुविधा
- 2. बारिश का पानी सहेजकर शुरू किया मछली पालन | पहले साल 5 हजार की अतिरिक्त आय
- 3. जल संरक्षण से बढ़ी ग्रामीण आजीविका | बेन्द्राचुवा बना खेती और मछली पालन का उदाहरण

बारिश पर निर्भर खेती को मिला सहारा
धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंचायत पठार के आश्रित गांव बेन्द्राचुवा में जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन की एक प्रेरक तस्वीर सामने आई है। यहां किसान प्रभु लाल पिता तीजू राम ने आजीविका डबरी का उपयोग सिंचाई के साथ मछली पालन के लिए भी शुरू किया है।
किसान के पास करीब 2.5 एकड़ कृषि भूमि है। पहले खेती मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर थी। बारिश की अनिश्चितता के कारण कई बार फसलों को नुकसान उठाना पड़ता था।
2.55 लाख की स्वीकृति से बनी आजीविका डबरी
वर्ष 2025-26 में प्रभु लाल के खेत में ‘वीबी-जी रामजी योजना’ के तहत आजीविका डबरी निर्माण की स्वीकृति मिली। इसके लिए 2.55 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई, जबकि निर्माण पर 2.24 लाख रुपए का व्यय हुआ।
डबरी बनने के बाद बारिश के पानी का संचयन होने लगा और खेत के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी। इससे फसल की जरूरत के समय सिंचाई करना आसान हुआ।
सिंचाई के साथ शुरू किया मछली पालन
प्रभु लाल ने डबरी को केवल सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने के बजाय इसमें 5 किलोग्राम मछली बीज डालकर मछली पालन भी शुरू किया।
इससे उन्हें पहले ही वर्ष करीब 5 हजार रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। किसान के लिए यह अतिरिक्त आमदनी घरेलू जरूरतों में मददगार साबित हुई है।
जल संरक्षण से बढ़ी खेती की संभावनाएं
डबरी के जरिए सिंचाई सुविधा मिलने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार आया। वहीं मछली पालन ने आय का एक अतिरिक्त स्रोत तैयार कर दिया।
किसान प्रभु लाल के अनुसार, डबरी बनने के बाद उन्हें पानी की चिंता कम हुई है। एक ही जलस्रोत से खेत की सिंचाई के साथ मछली पालन भी हो रहा है।
बेन्द्राचुवा की यह पहल बताती है कि जल संरक्षण, सिंचाई और मछली पालन को साथ जोड़कर ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका के नए अवसर तैयार कर सकते हैं।
