बिहान से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती को बनाया आजीविका का जरिया, ‘लखपति दीदी’ बनने की राह में बढ़े कदम

रायपुर, 5 अक्टूबर 2026। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के ग्राम अमारू में महिला स्वसहायता समूहों की दीदियां लेमन ग्रास की सामूहिक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। बिहान योजना से जुड़ी 10 महिला स्वसहायता समूहों ने करीब 20 एकड़ भूमि पर लेमन ग्रास की खेती शुरू की है।
खेती से आय बढ़ाने की तैयारी
ग्राम अमारू की महिलाएं लेमन ग्रास की खेती के बाद इससे तेल निकालकर बाजार और औषधीय संस्थानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं। लेमन ग्रास के तेल का उपयोग चाय, इत्र और विभिन्न औषधीय उत्पादों में किया जाता है।
ज्योति महिला समूह की सदस्य गायत्री काशीपुरी के अनुसार, उनके समूह की 11 महिलाएं पादप औषधि बोर्ड के सहयोग से लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं। समूह का लक्ष्य उत्पादन के साथ तेल निकालकर उसे बाजार तक पहुंचाना है।
सरकारी योजनाओं से मिला आर्थिक सहयोग
महामाया समूह की सुशीला भानू, जय संतोषी माता समूह की पाबरिया भानू और हनी समूह की पूजा ध्रुव ने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिले हैं।
समूहों को 15 हजार रुपये की चक्रीय राशि, 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि और बैंक लिंकेज का लाभ मिला है। इन संसाधनों की मदद से महिलाएं लेमन ग्रास के साथ सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय, टेंट हाउस, सब्जी-बाड़ी, किराना दुकान, बकरी पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ रही हैं।
‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में कदम
ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाने की पहल के तहत अमारू की महिलाओं का यह प्रयास महत्वपूर्ण है। सामूहिक खेती के साथ यदि प्रसंस्करण और बाजार से बेहतर जुड़ाव होता है, तो लेमन ग्रास महिलाओं के लिए नियमित आय का माध्यम बन सकता है।
खेतों से बढ़ रहा आत्मविश्वास
अमारू की महिला समूहों की यह पहल स्थानीय संसाधनों के उपयोग और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने का उदाहरण बन रही है। खेती और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से महिलाओं की आय बढ़ने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और निर्णय लेने के आत्मविश्वास को भी बढ़ावा मिल रहा है।
