जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, तीन महिलाएं भी शामिल

जगदलपुर, 5 सितंबर 2026। बहुचर्चित झीरम घाटी कांड में करीब 13 साल बाद विशेष एनआईए अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने मामले में नामजद सभी 10 आरोपियों को दोषी पाया है। इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं।
अदालत का यह फैसला लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद आया है। झीरम घाटी कांड को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ की निगाहें इस फैसले पर टिकी थीं। अब दोषसिद्धि के बाद अदालत द्वारा दोषियों को सुनाई जाने वाली सजा पर नजर रहेगी।
27 लोगों की हत्या और 15 की हत्या के प्रयास का मामला
मामले में 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को इन आरोपों से जुड़े मामले में दोषी ठहराया है।
फैसले के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में दोषियों की सजा निर्धारित की जाएगी। अदालत के निर्णय से झीरम घाटी मामले की लंबे समय से चली आ रही न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव आया है।
10 दोषियों में तीन महिलाएं भी
इस मामले में दोषी पाए गए 10 आरोपियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। अदालत के फैसले के बाद अब सभी दोषियों के खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दोषसिद्धि के बाद सजा को लेकर अदालत की अगली प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी पर अब पीड़ित परिवारों और पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी क्षेत्र में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के काफिले पर बड़ा नक्सली हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।
घटना के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और वर्षों तक सुनवाई चलती रही।
13 साल बाद आया फैसला
झीरम घाटी कांड को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और चर्चित नक्सली हमलों में गिना जाता है। करीब 13 साल बाद विशेष NIA अदालत का फैसला आने से मामले की न्यायिक प्रक्रिया में अहम मोड़ आया है।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को अदालत क्या सजा सुनाती है। सजा को लेकर आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
