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24 अगस्त के बाद दो चरणों में बढ़ी कीमत, मानसून के बाद निर्माण कार्य तेज होने पर सरकारी योजनाओं और ठेकेदारों पर बढ़ सकता है वित्तीय दबाव

रायपुर। मानसून की विदाई से पहले ही सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी से छत्तीसगढ़ के निर्माण क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। नॉन-ट्रेड सीमेंट के दाम दो चरणों में कुल 60 रुपये प्रति बोरी तक बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। 24 अगस्त को 40 रुपये और इसके बाद 20 रुपये की वृद्धि बताई जा रही है।
बारिश के कारण फिलहाल कई निर्माण कार्यों की गति धीमी है, लेकिन मानसून के बाद काम तेज होने पर बढ़ी कीमतों का असर निर्माण लागत पर दिखाई दे सकता है।
OPC सीमेंट भी 90 रुपये तक महंगा
सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले OPC सीमेंट की कीमत भी बढ़ने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि OPC का दाम करीब 270 रुपये से बढ़कर 360 रुपये प्रति बोरी हो गया है।
OPC में फ्लाईऐश का इस्तेमाल नहीं होता, जबकि PPC सीमेंट में फ्लाईऐश मिलाया जाता है। बड़े भवनों, पुल और फ्लाईओवर जैसे निर्माण कार्यों में OPC का इस्तेमाल अधिक किया जाता है।
खुले बाजार में भी बढ़ सकते हैं दाम
नॉन-ट्रेड सीमेंट के बाद अब खुले बाजार में बिकने वाले सीमेंट की कीमतों में भी करीब 20 रुपये प्रति बोरी तक बढ़ोतरी की तैयारी की बात कही जा रही है।
कारोबारियों के अनुसार बारिश के कारण फिलहाल सीमेंट की मांग कमजोर है और केवल जरूरी निर्माण कार्य ही जारी हैं। वर्तमान में थोक बाजार में सीमेंट करीब 230 से 270 रुपये और खुदरा बाजार में 240 से 280 रुपये प्रति बोरी के आसपास बताया जा रहा है।
सरकारी परियोजनाओं पर पड़ सकता है असर
छत्तीसगढ़ में कई बड़े सरकारी निर्माण कार्य चल रहे हैं। नवा रायपुर में राजभवन सहित एनआरडीए की करीब 700 से 800 करोड़ रुपये की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। वहीं अंबेडकर अस्पताल में भी चार बड़ी इमारतों का निर्माण जारी है।
इसके अलावा पांच नए मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी करीब 2 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। पीएम आवास और कंक्रीट सड़कों जैसी योजनाओं में भी बड़े स्तर पर निर्माण कार्य हो रहे हैं।
मानसून के बाद इन परियोजनाओं में काम तेज होने पर सीमेंट की बढ़ी कीमत का सीधा असर लागत पर पड़ने की संभावना है।
बिल्डर एसोसिएशन ने जताई चिंता
बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया की छत्तीसगढ़ शाखा के प्रदेश अध्यक्ष रूपेश सिंघल के अनुसार नॉन-ट्रेड सीमेंट में 60 रुपये की बढ़ोतरी करीब 30 प्रतिशत तक बैठती है।
उनका कहना है कि कीमत बढ़ने से सरकारी योजनाओं की लागत प्रभावित हो सकती है और पहले से स्वीकृत परियोजनाओं पर काम कर रहे ठेकेदारों के सामने अतिरिक्त वित्तीय दबाव पैदा हो सकता है।
