शहीद परिवारों का किया सम्मान, झीरम स्मारक को और स्मरणीय स्वरूप देने का प्रस्ताव तैयार

बस्तर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर जिले के झीरम घाटी पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीदों की स्मृति में पौधारोपण कर उनके बलिदान को नमन किया। इस दौरान श्रद्धा और संकल्प के नारों के साथ शहीदों को याद किया गया।
झीरम स्मारक को दिया जाएगा नया स्वरूप
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि झीरम के शहीदों की स्मृति में निर्मित स्मारक को जल्द ही और अधिक स्मरणीय स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने झीरम के शहीदों के परिजनों से मुलाकात की और उनका सम्मान किया। परिजनों ने झीरम की पवित्र मिट्टी पुलिस अधीक्षक को संग्रहित करने के लिए प्रदान की।

झीरम की घटना को बताया छत्तीसगढ़ की भयंकर विभीषिका
विजय शर्मा ने कहा कि झीरम की घटना छत्तीसगढ़ के लिए एक भयंकर विभीषिका थी। इस घटना में प्रदेश ने अपने वरिष्ठ और कुशल नेतृत्वकर्ताओं को खोया। पूर्व मंत्री स्वर्गीय नंदकुमार पटेल, नेता प्रतिपक्ष रहे स्वर्गीय महेंद्र कर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, सुरक्षा जवानों और नागरिकों का बलिदान छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूल सकता।
उन्होंने कहा कि वर्षों तक बस्तर को भय और हिंसा के साये में रखने वाली ताकतों के खिलाफ अब निर्णायक सफलता मिली है और संविधान, लोकतंत्र, तिरंगा तथा विकास की पहुंच बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक तेजी से बढ़ रही है।
तिरंगा यात्रा से दिया शांति और लोकतंत्र का संदेश
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब खुली और आजाद हवा में सांस ले रहा है। तीन दिवसीय बस्तर तिरंगा यात्रा के दौरान पांच जिलों में करीब 600 किलोमीटर की यात्रा कर शांति और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर तिरंगा फहराकर यह संदेश दिया गया कि भारत का संविधान देश के हर कोने में प्रभावी रूप से लागू होगा।
उन्होंने कहा कि अब कोई भी ताकत बंदूक के बल पर बस्तर की धरती को निर्दोषों के रक्त से रक्तरंजित नहीं कर सकेगी। झीरम के शहीदों का सपना लोकतंत्र, शांति, विकास और विश्वास से भरा बस्तर था और प्रदेश उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
3 हजार से अधिक लोगों ने चुना पुनर्वास का रास्ता
विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर को केवल गोलियों से नहीं, बल्कि हौसले, विश्वास और विकास के संकल्प से बदला गया है। हिंसा का रास्ता छोड़ चुके और भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि 3 हजार से अधिक लोगों ने पुनर्वास का रास्ता चुनकर हिंसा का त्याग किया है। उन्होंने इसे बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई सुबह का संकेत बताया।
अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
इस अवसर पर विधायक विनायक गोयल, महापौर जगदलपुर संजय पांडेय, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
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