दिल्ली की प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ की महिला उद्यमियों के उत्पादों ने खींचा व्यापारियों का ध्यान
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी जिले की महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत और रचनात्मकता अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है। विकासखंड पेंड्रा की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा स्थानीय विष्णुभोग धान से तैयार की गई आकर्षक राखियों ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में व्यापारियों और आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया।
प्रदर्शनी के बाद इन राखियों के लिए गुजरात और लुधियाना से ऑर्डर मिलने से महिला उद्यमियों में उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है।
दिल्ली की राष्ट्रीय प्रदर्शनी में दिखे स्थानीय उत्पाद

6 से 8 अगस्त तक दिल्ली में आयोजित बायोफेच इंडिया ईंटो ऑर्गेनिक प्रदर्शनी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इसमें विष्णुभोग धान, शहद और विष्णुभोग धान से निर्मित राखियां शामिल थीं।
इनमें धान से तैयार राखियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। स्थानीय कृषि उत्पाद को रचनात्मक तरीके से उपयोग कर तैयार किए गए इस उत्पाद में जिले की पहचान और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत की झलक दिखाई दी।
विष्णुभोग धान से राखी बनाने की अनूठी पहल
विष्णुभोग धान गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की विशिष्ट पहचान रखने वाले स्थानीय उत्पादों में शामिल है। महिला स्व-सहायता समूहों ने इसी स्थानीय संसाधन को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ते हुए राखी निर्माण में इसका इस्तेमाल किया।
स्थानीय संसाधन और महिलाओं की रचनात्मकता के इस मेल से तैयार राखियों को राष्ट्रीय प्रदर्शनी में अच्छी प्रतिक्रिया मिली। गुजरात और लुधियाना से मिले ऑर्डर ने इन उत्पादों के लिए नए बाजार के रास्ते खोल दिए हैं।
राष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का मिला अवसर
बिहान समूहों द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में लगातार अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
दिल्ली की प्रदर्शनी में जिले के उत्पादों को देशभर से आए व्यापारियों के सामने प्रस्तुत किया गया। इसका प्रत्यक्ष परिणाम राखियों के लिए गुजरात और लुधियाना से मिले ऑर्डर के रूप में सामने आया है।
महिलाओं में बढ़ा आत्मविश्वास
बाहरी राज्यों से मिले ऑर्डर से राखी निर्माण में जुटी महिला स्व-सहायता समूहों का उत्साह बढ़ा है। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार और उद्यमिता का अवसर मिल रहा है।
विष्णुभोग धान से तैयार राखियां महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ जिले के स्थानीय उत्पाद को नई पहचान दिलाने का माध्यम भी बन रही हैं। महिलाएं अपने हुनर को व्यावसायिक अवसर में बदलकर परिवार की आय में योगदान दे रही हैं।
‘लोकल से ग्लोबल’ की ओर बढ़ता जीपीएम
स्थानीय धान से तैयार राखियों को गुजरात और लुधियाना जैसे दूरस्थ बाजारों से ऑर्डर मिलना इस बात का संकेत है कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के स्थानीय उत्पादों में राष्ट्रीय बाजार की अच्छी संभावनाएं हैं।
महिला समूहों की मेहनत, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास मिलकर जिले को ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। विष्णुभोग धान से बनी राखियों की राष्ट्रीय पहचान ग्रामीण महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी बन रही है।
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