ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत घरघोड़ा पुलिस की कार्रवाई, ‘शुष्क इंडिया लिमिटेड’ के जरिए लोगों से निवेश कराने और रकम वापस नहीं करने के मामले में आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया

रायगढ़, 5 सितंबर। जिले में फरार आरोपियों और लंबित वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत रायगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। घरघोड़ा थाना पुलिस ने चिटफंड कंपनी ‘शुष्क इंडिया लिमिटेड’ के फरार डायरेक्टर सुनील तिवारी को जशपुर से हिरासत में लेकर रायगढ़ लाया।
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन में चल रही कार्रवाई के दौरान यह गिरफ्तारी की गई। धरमजयगढ़ एसडीओपी सिद्धांत तिवारी के सुपरविजन में थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू की टीम ने आरोपी को पकड़ा।
मुखबिर की सूचना पर जशपुर पहुंची पुलिस
घरघोड़ा थाना प्रभारी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि चिटफंड मामले में लंबे समय से फरार चल रहा आरोपी सुनील तिवारी जशपुर आया हुआ है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे जशपुर से अभिरक्षा में लिया और घरघोड़ा थाना लाकर पूछताछ की।
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपराध में शामिल होने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।
2012 से लोगों से कराया जा रहा था निवेश
पुलिस के अनुसार पूरा मामला घरघोड़ा थाना क्षेत्र के नवापारा का है। 27 मार्च 2017 को नवापारा निवासी लालबाबू गुप्ता ने थाना घरघोड़ा में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के मुताबिक नवापारा में राजकुमार कोसे द्वारा ‘शुष्क इंडिया लिमिटेड’ नामक कंपनी संचालित की जा रही थी। कंपनी के माध्यम से लोगों को कम समय में अधिक रकम मिलने का लालच देकर निवेश कराया जाता था।
शिकायतकर्ता ने भी वर्ष 2012 से अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर हर महीने 601 रुपये जमा करना शुरू किया था। क्षेत्र के कई अन्य लोगों ने भी कंपनी की मासिक बचत योजना और फिक्स्ड डिपॉजिट में रकम जमा की थी।
2016 में कंपनी बंद कर फरार हुआ संचालक
पुलिस के मुताबिक वर्ष 2016 में स्थानीय संचालक राजकुमार कोसे निवेशकों की रकम वापस किए बिना नवापारा घरघोड़ा से फरार हो गया। बाद में जब वह वापस आया तो निवेशकों ने अपनी जमा राशि लौटाने की मांग की।
आरोप है कि इस दौरान कंपनी बंद होने और उसके खिलाफ मामला चलने की बात कहकर लोगों की रकम वापस करने से इनकार कर दिया गया। निवेशकों को कंपनी की ओर से बांड पेपर भी दिए गए थे।
शिकायत के आधार पर घरघोड़ा थाने में अपराध क्रमांक 61/2017 दर्ज किया गया। मामले में धारा 420, 467, 468 भादवि तथा छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 6 और 10 के तहत कार्रवाई शुरू हुई।
जांच में सामने आए कंपनी के तीन डायरेक्टर
विवेचना के दौरान पुलिस ने निवेशकों के बयान दर्ज किए और बांड पेपर सहित कंपनी के कार्यालय से संबंधित सामान जब्त किया। स्थानीय संचालक राजकुमार कोसे को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था।
इसके बाद कंपनी के मुख्य डायरेक्टरों की जानकारी जुटाने के लिए ROC ग्वालियर से रिकॉर्ड प्राप्त किया गया। जांच में तीन डायरेक्टरों के नाम सामने आए—
- दिनेश सैनी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर, मध्य प्रदेश
- नरेंद्र लोधी, निवासी मक्सी, जिला शाजापुर, मध्य प्रदेश
- सुनील तिवारी, निवासी इंदौर, मध्य प्रदेश
दिनेश सैनी को भी पहले गिरफ्तार कर चुकी है पुलिस
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी दिनेश सैनी उज्जैन केंद्रीय जेल में निरुद्ध है। न्यायालय के आदेश पर उसे प्रोडक्शन वारंट के जरिए जेल से लेकर पूछताछ की गई।
पुलिस के मुताबिक अपराध स्वीकार करने के बाद 28 जून 2022 को दिनेश सैनी को विधिवत गिरफ्तार किया गया था और न्यायालय के आदेश पर उसे न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल उज्जैन भेज दिया गया।
सुनील तिवारी की गिरफ्तारी से जांच को मिली गति
मामले में फरार चल रहे सुनील तिवारी की तलाश पुलिस लगातार कर रही थी। इसी दौरान उसके जशपुर आने की सूचना मिलने पर पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपराध करने की बात स्वीकार की है। अब पुलिस चिटफंड कंपनी के नेटवर्क, निवेशकों से जुटाई गई रकम और मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर आगे की जांच कर रही है।
गिरफ्तारी में इनकी रही अहम भूमिका
फरार आरोपी सुनील तिवारी की पतासाजी और गिरफ्तारी में घरघोड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू, एएसआई डेविड टोप्पो और आरक्षक हरीश पटेल की अहम भूमिका रही।




