नक्सल प्रभावित इलाके में हुनर और स्थानीय संसाधनों से रोजगार की राह, इमली- महुआ प्रसंस्करण इकाइयों को भी मिलेगा बढ़ावा

बस्तर, 20 अगस्त 2026। कभी नक्सल हिंसा के लिए पहचान रखने वाला बस्तर अब विकास और बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिले के ग्राम पंचायत नेतानार में स्थापित शहीद वीर गुंढाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार का नया माध्यम बन रहा है।
ग्राम पंचायत नेतानार के सीआरपीएफ कैंप में संचालित सेवा डेरा में जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना ने सिलाई मशीन प्रशिक्षण, ढेकी से चावल निर्माण और इमली चपाती निर्माण जैसी गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
महिलाओं के लिए उत्पादन यूनिट स्थापित करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना ने कहा कि महिलाओं द्वारा किए जा रहे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इन गतिविधियों को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने सिलाई मशीन का प्रशिक्षण ले रही महिलाओं के लिए उत्पादन यूनिट स्थापित करने की पहल करने के निर्देश दिए। इससे प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और नियमित आय के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
इसके साथ ही उन्होंने समूह आधारित उत्पादन, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार और उनके बेहतर विपणन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
कामानार के सेवा डेरा का भी किया निरीक्षण
इसके बाद जिला पंचायत सीईओ ने ग्राम पंचायत कामानार स्थित कैंप परिसर के सेवा डेरा का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने ग्रामीणों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं से सेवा डेरा की स्थापना को लेकर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने अधिकारियों को सेवा डेरा की कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि सेवा डेरा के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इस पहल से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनावश्यक परेशानी और लंबी दूरी तय करने से राहत मिलने की उम्मीद है।
इमली और महुआ प्रसंस्करण इकाइयों की मांग
निरीक्षण के दौरान स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने इमली प्रसंस्करण इकाई और महुआ लड्डू प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के संबंध में जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन सौंपा।
महिलाओं ने बताया कि इन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से क्षेत्र में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और महिलाओं की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
तन्मय खन्ना ने महिलाओं के प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त करते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
स्थानीय संसाधनों से रोजगार की नई राह
बस्तर के दूरस्थ इलाकों में सेवा डेरा जैसी पहल ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय हुनर और संसाधनों को रोजगार से जोड़ने का काम कर रही है।
सिलाई, चावल निर्माण, इमली प्रसंस्करण और महुआ से उत्पाद तैयार करने जैसी गतिविधियों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
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