भिलाई नगर पुलिस ने उदयपुर से रमेश सुथार को पकड़ा, पहले गिरफ्तार 5 आरोपियों से पूछताछ के बाद सामने आया नाम

भिलाई में ऑनलाइन ठगी के एक मामले में भिलाई नगर पुलिस ने राजस्थान के उदयपुर जिले से 25 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी रमेश सुथार ठगी से हासिल रकम को दूसरे लोगों के बैंक खातों के जरिए निकालने और इस्तेमाल करने में शामिल था। ये खाते कथित तौर पर ठगी की रकम को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
आरोपी का नाम मामले की पहले से चल रही जांच के दौरान सामने आया। पुलिस इस प्रकरण में पहले ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। उनसे पूछताछ और जांच में मिले बैंक लेन-देन व अन्य सबूतों के आधार पर रमेश सुथार की कथित भूमिका का पता चला।
2024 में दर्ज हुआ था ऑनलाइन ठगी का मामला
भिलाई नगर थाने में ऑनलाइन ठगी की शिकायत के बाद वर्ष 2024 में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुलिस को ठगी की रकम के लेन-देन और उसे अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचाने से जुड़ी जानकारी मिली।
बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के दौरान रमेश सुथार का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार, वह अन्य आरोपियों के साथ मिलकर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में पहुंचाने और बाद में वहां से रकम निकालने की प्रक्रिया में शामिल था।
दूसरे लोगों के खातों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम सीधे मुख्य आरोपियों के खातों में रखने के बजाय अन्य लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। ऐसे खातों को आम तौर पर म्यूल खाते (Mule Accounts) कहा जाता है।
इन खातों में ठगी की रकम आने के बाद उसे अलग-अलग माध्यमों से निकाला जाता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रमेश सुथार के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और कितने बैंक खातों के जरिए कथित तौर पर ठगी की रकम का लेन-देन किया गया।
राजस्थान में तलाश के बाद आरोपी गिरफ्तार
रमेश सुथार राजस्थान के उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील के ग्राम बना का रहने वाला बताया गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए भिलाई नगर पुलिस ने विशेष टीम बनाई और राजस्थान में उसके संभावित ठिकानों पर तलाश शुरू की।
लगातार प्रयास के बाद पुलिस टीम ने 2 सितंबर को रमेश सुथार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
पुलिस अब मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। बैंक खातों में हुए लेन-देन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और आरोपियों के आपसी संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और उसे निकालने या आगे ट्रांसफर करने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
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