स्वतंत्रता दिवस पर नवसाक्षरों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और सामाजिक संस्थाओं ने लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा

रायगढ़। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शिक्षा और साक्षरता को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रायगढ़ जिले में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत उल्लास महा-चौपाल का आयोजन किया गया। कलेक्टर के निर्देशन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकासखंडों से शैक्षणिक संस्थानों, विभागों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
राष्ट्रीय पर्व को साक्षरता, शिक्षा और जनजागरूकता से जोड़ते हुए आयोजित महा-चौपाल में नवसाक्षरों, स्वयंसेवी शिक्षकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया गया और नवसाक्षरों को सीखने की प्रक्रिया लगातार जारी रखने के लिए प्रेरित किया गया।
मशाल रैली से रंगोली तक, विभिन्न गतिविधियों से दिया साक्षरता का संदेश

उल्लास महा-चौपाल के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर कई जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें नारा लेखन, मशाल रैली, मोबाइल टॉर्च रैली, उल्लास शपथ, सेल्फी प्वाइंट, कहानी वाचन, रंगोली निर्माण और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख रहे।
इन गतिविधियों के जरिए साक्षरता के महत्व को रोचक और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया गया। रैलियों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पढ़ना-लिखना केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति की मजबूत आधारशिला भी है।
साक्षरता को जन आंदोलन बनाने पर जोर
महा-चौपाल के आयोजन से जिलेभर में साक्षरता को लेकर उत्साहपूर्ण वातावरण बना। विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों की व्यापक भागीदारी ने यह संदेश दिया कि साक्षरता किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में नवसाक्षरों को शिक्षा से निरंतर जुड़े रहने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी पढ़ाई-लिखाई के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से जिले में साक्षर समाज के निर्माण की दिशा में लगातार काम करने का संकल्प दोहराया गया।
स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित उल्लास महा-चौपाल ने ‘उल्लास’ कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाने और साक्षरता को जन आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रीय पर्व पर हुआ यह आयोजन शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने और प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञान की मुख्यधारा से जोड़ने के सामूहिक संकल्प का प्रतीक बना।
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