10 मिनट की देरी ने टाल दी मौत, त्रिशूली नदी में बहती दिखीं कारें और लाशें; 28 अगस्त को रायपुर लौटे पांचों दोस्त

रायपुर। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोगों की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए। इसी बाढ़ के बीच रायपुर के माना कैंप इलाके के रहने वाले पांच दोस्त भी फंस गए थे। हालांकि, एक छोटे से फैसले ने उनकी जान बचा ली। पांचों दोस्त उस समय होटल में चाय पीने के लिए रुक गए थे। अगर वे कुछ मिनट पहले वहां से निकल जाते, तो संभव है कि वे भी बाढ़ के तेज बहाव की चपेट में आ जाते।
नेपाल से सुरक्षित लौटे इन पांच दोस्तों के नाम नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर हैं। सभी की उम्र करीब 50 से 60 वर्ष के बीच बताई गई है। पांचों दोस्त 21 अगस्त को रायपुर से नेपाल के लिए रवाना हुए थे और 22 अगस्त को नेपाल पहुंचे थे।
चाय के लिए रुके और बदल गई पूरी कहानी
सैलून संचालक नारायण सेन ने बताया कि 26 अगस्त को वे लोग धाडिंग जिले के मलेखु कस्बे में एक होटल में चाय पीने के लिए रुके थे। इसी दौरान अचानक उन्हें बाढ़ की जानकारी मिली। नारायण सेन के मुताबिक, अगर वे 10-15 मिनट पहले वहां से निकल गए होते तो शायद बाढ़ के बीच फंस जाते।
होटल में मौजूद लोगों ने उन्हें बताया कि आगे का एक पुल बाढ़ में बह चुका है। इसके बाद पांचों दोस्तों ने आगे जाने के बजाय वहीं रुकने का फैसला किया। होटल मालिक भारतीय थे और उन्होंने संकट की स्थिति में दोस्तों की काफी मदद की। उन्होंने खाने की व्यवस्था भी की।
त्रिशूली नदी में बहती दिखीं कारें और मलबा
बाढ़ का मंजर देखकर पांचों दोस्त बुरी तरह डर गए। उन्होंने त्रिशूली नदी के तेज बहाव में कारों, मलबे और अन्य सामान को बहते हुए देखा। बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा था और आसपास के इलाकों में तबाही मच चुकी थी।
दोस्तों ने बताया कि उन्होंने मलेखु में ऊंची जगह पर शरण ली और रात अपनी कार में बिताई। इस दौरान उन्हें लगातार डर लगा रहा कि कहीं पानी का बहाव और तेज न हो जाए। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से वे सुरक्षित स्थान पर बने रहे।
पुलिस हेड कॉन्स्टेबल दिनेश सिंह ठाकुर ने बताया कि जब बाढ़ आई, तब वे लोग पशुपतिनाथ मंदिर से करीब 50 किलोमीटर दूर थे। उन्होंने कहा कि होटल में चाय पीते समय अचानक लोग घबराने लगे। बाद में उन्हें पता चला कि बाढ़ ने कई गांवों, इमारतों और पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है।
बाढ़ के बाद का मंजर देखकर सहमे
बाढ़ का पानी कम होने के बाद पांचों दोस्त हालात देखने के लिए त्रिशूली नदी के किनारे पहुंचे। वहां का मंजर देखकर वे भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि कई परिवार अपने लापता लोगों की तलाश कर रहे थे। चारों तरफ मलबा और तबाही दिखाई दे रही थी।
दिनेश सिंह ठाकुर ने बताया कि उस समय वे लगातार भगवान शिव का नाम जप रहे थे। उनका मानना है कि भगवान शिव की कृपा से ही पांचों दोस्त सुरक्षित बच सके।
बिजली-पानी बंद, फिर भी प्रशासन ने की मदद
बाढ़ के कारण कई जगह बिजली और पानी की व्यवस्था प्रभावित हो गई थी। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने फंसे हुए लोगों की मदद की। दोस्तों ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी।
उन्होंने नेपाल के स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग के लिए आभार भी जताया।
इंटरनेट और हेल्पलाइन से परिवार से जुड़े रहे
बाढ़ के दौरान पांचों दोस्तों के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि वहां इंटरनेट सेवा काम कर रही थी। उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से अपने परिवार के लोगों से संपर्क किया और उन्हें अपनी सुरक्षित स्थिति की जानकारी दी।
इसके साथ ही भारत सरकार की हेल्पलाइन के जरिए भी अपनी लोकेशन और स्थिति की जानकारी साझा की गई। इससे रायपुर में मौजूद उनके परिवारों को राहत मिली और वे लगातार अपने परिजनों के संपर्क में बने रहे।
नेपाल से रायपुर लौटे पांचों दोस्त
बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच कुछ दिन नेपाल में रुकने के बाद पांचों दोस्त 28 अगस्त को रायपुर के लिए रवाना हुए और शनिवार को माना कैंप स्थित अपने घर लौटे।
नेपाल से लौटे दोस्तों ने बताया कि बाढ़ के बाद उन्होंने जो तबाही देखी, उसे वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। दर्जी का काम करने वाले दिनेश ओझा ने बताया कि कई लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में परेशान दिखाई दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद रात में कार के अंदर सोने की कोशिश की, लेकिन डर के कारण ठीक से नींद नहीं आई। हर समय यही चिंता बनी हुई थी कि कहीं दोबारा बाढ़ न आ जाए।
10 मिनट की देरी बनी जिंदगी की वजह
रायपुर के इन पांच दोस्तों की कहानी यह बताती है कि कभी-कभी कुछ मिनटों का फैसला भी जिंदगी और मौत के बीच अंतर बन जाता है। अगर वे उस समय होटल में चाय पीने के लिए नहीं रुकते और कुछ मिनट पहले आगे निकल जाते, तो शायद वे भी बाढ़ के तेज बहाव में फंस सकते थे।
नेपाल की त्रासदी से सुरक्षित लौटे इन पांचों दोस्तों ने भगवान, स्थानीय लोगों और प्रशासन का शुक्रिया अदा किया। उनके लिए नेपाल की यह यात्रा अब जिंदगी भर याद रहने वाला ऐसा अनुभव बन गई है, जिसमें एक चाय का छोटा सा ब्रेक उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला साबित हुआ।
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