अदालत ने कहा- वैवाहिक स्थिति न बताना अपने आप में धोखाधड़ी नहीं, बेईमानी की मंशा साबित होना जरूरी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी और द्विविवाह के आरोप से घिरी एक महिला के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने 12 अगस्त 2026 को दिए आदेश में कहा कि केवल वैवाहिक स्थिति से जुड़ी कोई जानकारी नहीं देना तब तक धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता, जब तक धोखा देने और बेईमानी से किसी व्यक्ति को प्रेरित करने की मंशा साबित न हो।
वैवाहिक विवाद से जुड़ा था मामला
यह मामला बिलासपुर की एक महिला और रायपुर निवासी उसके दूसरे पति के बीच वैवाहिक विवाद से जुड़ा था। महिला का पहले विवाह का मामला बिलासपुर के पारिवारिक न्यायालय में लंबित था। अदालत ने 28 जनवरी 2023 को डिक्री जारी कर पहले विवाह को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया था।
महिला का कहना था कि उसके दूसरे पति और परिवार को उसके पहले विवाह और तलाक की प्रक्रिया की जानकारी थी। वैवाहिक विवाद बढ़ने के बाद महिला ने महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
पति की शिकायत पर दर्ज हुई थी FIR
महिला की शिकायत के जवाब में उसके पति ने CrPC की धारा 156(3) के तहत रायपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के समक्ष आवेदन दिया था। मजिस्ट्रेट ने 24 जुलाई 2024 को पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद न्यू राजेंद्र नगर थाने में FIR दर्ज की गई और पुलिस ने जांच के बाद आरोप-पत्र दाखिल किया।
महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसने कोई तथ्य नहीं छिपाया और उसके खिलाफ मामला बदले की भावना से दर्ज कराया गया है।
हाईकोर्ट ने सबूतों को माना अपर्याप्त
हाईकोर्ट ने मामले की जांच में सामने आई सामग्री का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ‘हृदय रंजन प्रसाद वर्मा बनाम बिहार राज्य’ मामले के फैसले का भी हवाला दिया।
अदालत ने कहा कि जांच से ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि पति ने किसी धोखे में आकर महिला को अपनी संपत्ति या धन दिया था। ऐसे में धोखाधड़ी का आरोप टिक नहीं सकता।
द्विविवाह का आरोप भी खारिज
हाईकोर्ट ने द्विविवाह के आरोप को भी निराधार माना। अदालत के फैसले के बाद महिला के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला और उससे जुड़ी कार्रवाई निरस्त कर दी गई। इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक धोखाधड़ी के लिए केवल किसी तथ्य का छिपना पर्याप्त नहीं है, बल्कि धोखा देने की मंशा और उसके आधार पर बेईमानी से लाभ लेने या किसी को प्रेरित करने का तत्व भी साबित होना जरूरी है।
इसे भी पढ़े…..
सारंगढ़-बिलासपुर मार्ग पर भीषण हादसा, दो बाइक सवार गंभीर रूप से घायल
कृपया मेरे यूट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब करे : धन्यवाद…
इसे भी पढ़े…..
- रायगढ़ में गांजा तस्करी के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़, यूपी के 8 तस्कर गिरफ्तार; 34.865 किलो गांजा जब्त

- रायगढ़ में खैर-तेंदू लकड़ी तस्करी के बड़े सिंडिकेट का खुलासा, 3 आरोपी गिरफ्तार; एक फरार

- छत्तीसगढ़ की सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान-2026, प्रदेश से इकलौती शिक्षिका का हुआ चयन

- रायगढ़ के विकास को मिलेगी नई रफ्तार, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने किया प्रमुख परियोजनाओं का मैराथन निरीक्षण

- मरवाही में मृत भालू के नाखून काटकर ले गए आरोपी, वन विभाग ने दो को किया गिरफ्तार

Most Viewed Posts
- छत्तीसगढ़ के 42 नर्सिंग संस्थानों की मान्यता रद्द, रायपुर के 15 कॉलेज शामिल
- लेबर क्वार्टर हादसे में कंपनी मालिकों पर एफआईआर, महिला मजदूर की मौत के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई
- ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत रायगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 49.50 लाख की चिटफंड ठगी मामले में दो फरार आरोपी गिरफ्तार
- सहकारिता सप्ताह का समापन, किसानों को मिली योजनाओं की जानकारी
- छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा प्रमोशन, 61 SI बने इंस्पेक्टर
